पढ़िए श्री कृष्ण के 10 बेस्ट कोट्स जो जीवन की हर उलझन का सरल समाधान देते हैं

कभी ऐसा लगता है कि ज़िंदगी में सब कुछ होते हुए भी मन उलझा हुआ है? भविष्य का डर, बीते कल का पछतावा और सही-गलत का भ्रम — यही आज के इंसान की सबसे बड़ी परेशानी है। ऐसे समय में श्री कृष्ण के विचार सिर्फ प्रेरणा नहीं, बल्कि जीवन को समझने की स्पष्ट दिशा देते हैं…

आज की तेज़ भागती ज़िंदगी में हर इंसान किसी न किसी उलझन से जूझ रहा है। कोई अपने भविष्य को लेकर परेशान है, कोई रिश्तों को लेकर, तो कोई अपने कर्म और फैसलों को लेकर भ्रम में है। ऐसे समय में श्री कृष्ण के विचार हमें सिर्फ प्रेरणा ही नहीं देते, बल्कि जीवन को सही दिशा में आगे बढ़ने की समझ भी देते हैं। उनके शब्द इतने गहरे हैं कि हर दौर में, हर उम्र के इंसान को खुद से जोड़कर महसूस होते हैं। यही कारण है कि श्री कृष्ण के कोट्स आज भी उतने ही प्रासंगिक और असरदार हैं।

श्री कृष्ण के विचार आज भी क्यों प्रासंगिक हैं?

श्री कृष्ण के उपदेश किसी एक समय या युद्ध तक सीमित नहीं थे। उन्होंने जीवन के हर पहलू—कर्म, धैर्य, भय, प्रेम और आत्मविश्वास—को बहुत सरल शब्दों में समझाया। आज जब लोग तनाव, असफलता और तुलना की भावना से घिरे हुए हैं, तब कृष्ण के विचार हमें सिखाते हैं कि सही कर्म और सही सोच से ही सच्ची शांति मिलती है। उनके विचार हमें हालात से डरने के बजाय उन्हें स्वीकार करना और उनसे सीखना सिखाते हैं।

श्री कृष्ण के 10 बेस्ट कोट्स

यहाँ पर है श्री कृष्ण के 10 बेस्ट कोट्स जो आपकी उलझी जिंदगी को सुलझाकर उसमे प्रकाश भर दे:

*** 1st Quote ***

“कर्म किए जा, फल की चिंता मत कर।”

श्री कृष्ण इस कोट के माध्यम से हमें जीवन का सबसे बड़ा और गहरा सत्य समझाते हैं। कृष्ण कहते हैं कि इंसान का नियंत्रण केवल अपने कर्म पर है, उसके परिणाम पर नहीं। जब हम हर काम फल की चिंता में डूबकर करते हैं, तो डर, तनाव और असफलता का भय हमें अंदर से कमजोर कर देता है। लेकिन जब हम पूरे मन, ईमानदारी और जिम्मेदारी से अपना कर्म करते हैं, तो परिणाम अपने आप सही दिशा में आने लगते हैं।

श्री कृष्ण यह भी सिखाते हैं कि फल की आस हमें वर्तमान से दूर कर देती है, जबकि जीवन हमेशा वर्तमान में सही कर्म करने से ही बदलता है। यह विचार आज के समय में और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है, जब लोग मेहनत से पहले ही सफलता की गारंटी चाहते हैं। कृष्ण का संदेश साफ है — मेहनत से पीछे मत हटो, रास्ते में रुकावटें आएँगी, लेकिन सही कर्म आपको सफल जरूर बनाएंगे।

यह कोट हमें सिखाता है कि:

  • काम पूरी ईमानदारी से करो, परिणाम भगवान पर छोड़ दो।
  • डर और तनाव से मुक्त होकर आगे बढ़ो।
  • हर दिन सही कर्म करते रहो, सफलता खुद रास्ता खोज लेगी।
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*** 2nd Quote ***

“जो हुआ, वह अच्छा हुआ; जो हो रहा है, वह अच्छा हो रहा है और जो होगा, वो भी अच्छा ही होगा।”

श्री कृष्ण इस विचार के माध्यम से हमें जीवन को देखने का सबसे सकारात्मक और शांत दृष्टिकोण सिखाते हैं। कृष्ण कहते हैं कि जीवन में जो भी घटित होता है, वह किसी न किसी कारण से और हमारे ही भले के लिए होता है, भले ही उस समय हमें उसका अर्थ समझ में न आए। अक्सर इंसान बीते हुए समय को लेकर पछतावा करता है और आने वाले कल को लेकर डर में जीता है, जिससे उसका वर्तमान खराब हो जाता है।

श्री कृष्ण यह समझाते हैं कि जब हम यह मान लेते हैं कि जो हुआ वह सही था, तो मन से बोझ उतर जाता है। जो अभी हो रहा है, उसे स्वीकार करने से हमें धैर्य और मानसिक शांति मिलती है। और जो भविष्य में होगा, उस पर भरोसा रखने से जीवन में डर की जगह विश्वास पैदा होता है। यह कोट हमें सिखाता है कि हर परिस्थिति हमें कुछ न कुछ सिखाने आती है, चाहे वह सुख हो या दुःख।

इस कोट से हमें यह सीख मिलती है कि

  • बीते हुए कल को लेकर पछताना व्यर्थ है, उसे स्वीकार करना ही समझदारी है।
  • वर्तमान परिस्थितियों से लड़ने के बजाय उन्हें समझना चाहिए।
  • भविष्य की चिंता छोड़कर ईश्वर पर भरोसा रखना ही सच्ची शांति देता है।a
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*** 3rd Quote ***

“क्रोध से भ्रम पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है, जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता है। जब तर्क नष्ट होता है तब व्यक्ति का पतन हो जाता है।”

श्री कृष्ण इस गहरे वाक्य के माध्यम से मानव मन की सबसे खतरनाक कमजोरी — क्रोध — को बहुत सरल लेकिन प्रभावशाली तरीके से समझाते हैं। कृष्ण बताते हैं कि क्रोध सिर्फ एक भावना नहीं है, बल्कि यह धीरे-धीरे इंसान की सोच, समझ और निर्णय लेने की शक्ति को नष्ट कर देता है। जब मन क्रोध से भर जाता है, तो सही-गलत का भेद खत्म होने लगता है और व्यक्ति भ्रम में फैसले लेने लगता है।

श्री कृष्ण समझाते हैं कि भ्रम की अवस्था में बुद्धि स्थिर नहीं रह पाती। व्यक्ति जल्दबाजी, अहंकार और आवेग में ऐसे निर्णय कर बैठता है, जिनका उसे बाद में गहरा पछतावा होता है। जब बुद्धि व्यग्र हो जाती है, तब तर्क और विवेक समाप्त हो जाते हैं, और इंसान अपनी ही बनाई समस्याओं में उलझकर धीरे-धीरे पतन की ओर बढ़ने लगता है।

यह संदेश आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है, जहाँ गुस्सा रिश्ते तोड़ देता है, करियर बिगाड़ देता है और इंसान को अपने लक्ष्य से भटका देता है। श्री कृष्ण का संकेत स्पष्ट है — क्रोध पर नियंत्रण ही जीवन को संतुलन और सही दिशा देता है।

यह कोट हमें सिखाता है कि

  • क्रोध में लिया गया निर्णय हमेशा नुकसान पहुँचाता है।
  • शांत बुद्धि ही सही तर्क और सही मार्ग दिखाती है।
  • स्वयं पर नियंत्रण ही सच्ची शक्ति है, कमजोरी नहीं।
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*** 4th Quote ***

“जो अपने मन को नियंत्रित नहीं करते, उनके लिए मन शत्रु के समान कार्य करता है।”

श्री कृष्ण इस विचार के माध्यम से हमें बताते हैं कि इंसान का सबसे बड़ा मित्र या सबसे बड़ा शत्रु उसका अपना मन ही होता है। जब मन पर हमारा नियंत्रण नहीं रहता, तो वही मन हमें डर, भ्रम, लालच और नकारात्मक सोच की तरफ धकेल देता है। ऐसे में इंसान सही और गलत में फर्क करना भूल जाता है और अपने ही फैसलों से नुकसान उठा बैठता है।

श्री कृष्ण समझाते हैं कि बिना संयम के मन हमें आलस्य, गुस्से और भटकाव की राह पर ले जाता है, जिससे जीवन की दिशा बिगड़ने लगती है। लेकिन जब वही मन अनुशासन में आ जाता है, तो वह हमारा सबसे मजबूत सहायक बन जाता है। आज के समय में, जहाँ हर तरफ तनाव और तुलना है, यह संदेश हमें सिखाता है कि बाहर की परिस्थितियाँ नहीं, बल्कि मन की अस्थिरता हमें सबसे ज्यादा कमजोर बनाती है।

यह कोट हमें सिखाता है कि

  • अपने मन पर नियंत्रण रखना ही सच्ची जीत है।
  • नकारात्मक सोच से दूरी बनाना जरूरी है।
  • शांत और संतुलित मन ही सही निर्णय ले सकता है।
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*** 5th Quote ***

“अपने कर्तव्य का पालन करो, चाहे वह कठिन ही क्यों न हो।”

श्री कृष्ण इस विचार के माध्यम से हमें यह सिखाते हैं कि जीवन में सबसे बड़ी परीक्षा तब आती है, जब सही रास्ता आसान नहीं बल्कि कठिन होता है। श्री कृष्ण कहते हैं कि कर्तव्य वही होता है, जो हमें सही लगे, भले ही उसमें डर हो, संघर्ष हो या असुविधा हो। आसान रास्ता हर कोई चुन सकता है, लेकिन कर्तव्य का रास्ता वही चुनता है जो भीतर से मजबूत होता है।

श्री कृष्ण यह भी समझाते हैं कि जब इंसान कठिनाई देखकर अपने कर्तव्य से पीछे हटता है, तो वह केवल परिस्थिति से नहीं, बल्कि खुद से हार जाता है। लेकिन जो व्यक्ति हालातों से डरकर नहीं, बल्कि अपने धर्म और जिम्मेदारी को समझकर आगे बढ़ता है, वही सच्चे अर्थों में सम्मान और आत्मशांति प्राप्त करता है। आज के समय में, जब लोग मुश्किल आते ही रास्ता बदल लेते हैं, यह विचार हमें डटे रहने और सही निर्णय लेने की प्रेरणा देता है।

यह कोट हमें यह सिखाता है कि

  • कठिन समय में लिया गया सही निर्णय ही असली चरित्र दिखाता है।
  • कर्तव्य निभाना कभी आसान नहीं होता, लेकिन वही जीवन को सही दिशा देता है।
  • जो व्यक्ति अपने कर्तव्य से नहीं भागता, वही अंत में सच्ची विजय पाता है।
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*** 6th Quote ***

“जो व्यक्ति इंद्रियों को नियंत्रित कर लेता है, वही सच्चा विजेता होता है।”

श्री कृष्ण इस विचार के माध्यम से बताते हैं कि जीवन की सबसे बड़ी लड़ाई बाहर नहीं, बल्कि अपने ही मन और इंद्रियों के साथ होती है। जो व्यक्ति स्वाद, क्रोध, आलस्य, लालच और वासना जैसी इंद्रिय-इच्छाओं के वश में आ जाता है, वह चाहे बाहर से कितना भी सफल दिखे, अंदर से कमजोर रहता है। इसके विपरीत, जो इंसान अपने मन पर नियंत्रण रखता है, वही परिस्थितियों में भी संतुलित और मजबूत बना रहता है।

श्री कृष्ण समझाते हैं कि इंद्रियों का नियंत्रण कोई त्याग या मजबूरी नहीं है, बल्कि आत्मबल और समझदारी की पहचान है। आज के समय में, जहाँ आकर्षण और भटकाव हर कदम पर मौजूद हैं, वहाँ अपने लक्ष्य पर टिके रहना ही सच्ची विजय है। कृष्ण का संदेश साफ है — जो अपने मन को संभाल लेता है, वही अपने जीवन की दिशा भी सही कर लेता है।

इस कोट से हमें यह सीख मिलती है कि

  • इच्छाओं पर नियंत्रण ही आत्मविकास की पहली सीढ़ी है।
  • मन पर जीत हासिल करने वाला व्यक्ति हालातों से नहीं हारता।
  • सच्ची सफलता बाहरी नहीं, बल्कि भीतर की जीत से मिलती है।
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*** 7th Quote ***

“सच्चा सुख बाहरी चीज़ों में नहीं, भीतर की शांति में है।”

श्री कृष्ण इस विचार के माध्यम से हमें यह समझाते हैं कि इंसान अक्सर सुख की तलाश बाहर की चीज़ों में करता है—पैसा, नाम, पद, रिश्ते या भौतिक सुविधाएँ। लेकिन ये सभी चीज़ें केवल थोड़ी देर की खुशी देती हैं, स्थायी सुख नहीं। जब मन अशांत होता है, तब सब कुछ होते हुए भी इंसान खाली-खाली महसूस करता है। यही कारण है कि बाहरी सफलता के बावजूद कई लोग अंदर से टूटे हुए रहते हैं।

श्री कृष्ण बताते हैं कि असली सुख मन की स्थिरता और आत्मिक शांति से आता है। जब इंसान अपने भीतर संतोष, धैर्य और स्वीकार भाव पैदा करता है, तब परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, उसका मन शांत रहता है। भीतर की शांति हमें हर हाल में संतुलित रखती है और जीवन के उतार-चढ़ाव को सहज रूप से स्वीकार करने की ताकत देती है।

यह कोट हमें सिखाता है कि

  • सुख की खोज बाहर नहीं, अपने भीतर करनी चाहिए।
  • शांत मन ही सबसे बड़ी संपत्ति है।
  • जब भीतर शांति होती है, तब छोटी चीज़ें भी बड़ी खुशी देने लगती हैं।
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*** 8th Quote ***

“हे अर्जुन ! तुम्हारा क्या गया जो तुम रोते हो? तुम क्या लाए थे जो तुमने खो दिया? तुमने क्या पैदा किया था जो नष्ट हो गया? तुमने जो लिया यहीं से लिया, जो दिया यहीं पर दिया, जो आज तुम्हारा है, कल किसी और का होगा, क्योंकि परिवर्तन ही संसार का नियम है।”

श्री कृष्ण इस गहरे संदेश के माध्यम से अर्जुन को ही नहीं, बल्कि पूरे संसार को जीवन का शाश्वत सत्य समझाते हैं। कृष्ण कहते हैं कि इंसान जिस चीज़ के लिए रोता है, वह वास्तव में उसकी कभी थी ही नहीं। हम न तो कुछ लेकर आए थे और न ही कुछ लेकर जाएँगे, फिर खोने का दुःख किस बात का? जो कुछ भी हमें मिला है, वह इस संसार से ही मिला है और समय आने पर यहीं रह जाएगा।

श्री कृष्ण यह समझाते हैं कि संसार परिवर्तन पर टिका हुआ है। आज जो हमारा है, वह कल किसी और का होगा, और जो आज किसी और का है, वह कल हमारा भी हो सकता है। इसी बदलाव का नाम जीवन है। जब इंसान इस सत्य को समझ लेता है, तो उसके भीतर का डर, मोह और दुःख धीरे-धीरे समाप्त होने लगता है।

यह विचार हमें सिखाता है कि दुख का कारण वस्तुएँ नहीं, बल्कि उनसे जुड़ा अत्यधिक मोह होता है। जब हम यह मान लेते हैं कि सब कुछ अस्थायी है, तो जीवन हल्का, शांत और संतुलित हो जाता है। कृष्ण का संदेश आज के समय में इसलिए और भी जरूरी है, क्योंकि लोग छोटी-छोटी चीज़ों के लिए टूट जाते हैं, जबकि सच यह है कि परिवर्तन ही जीवन की सबसे बड़ी सच्चाई है।

इस कोट से हमें यह सीख मिलती है कि

  • जो मिला है, उसके लिए आभार रखो, लेकिन उससे चिपके मत रहो।
  • हर परिवर्तन को जीवन का स्वाभाविक नियम मानकर स्वीकार करो।
  • जब कुछ छिन जाए, तो यह समझो कि वह कभी स्थायी था ही नहीं।
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*** 9th Quote ***

“जो होने वाला है वो होकर ही रहता है और जो नहीं होने वाला वह कभी नहीं होता, ऐसा निश्चय जिनकी बुद्धि में होता है, उन्हें चिंता कभी नही सताती है।”

श्री कृष्ण इस विचार के माध्यम से जीवन की सबसे बड़ी चिंता का समाधान देते हैं। कृष्ण कहते हैं कि इस संसार में कुछ बातें हमारे नियंत्रण में होती हैं और कुछ बिल्कुल नहीं। जो चीज़ हमारे भाग्य या समय के अनुसार तय है, वह होकर ही रहती है, और जो हमारे लिए नहीं बनी, वह चाहे जितनी कोशिश कर लें, नहीं होती। जब इंसान इस सत्य को मन से स्वीकार कर लेता है, तो उसका मन अपने आप शांत होने लगता है।

श्री कृष्ण यह सिखाते हैं कि चिंता की जड़ ‘हमारा हर चीज पर नियंत्रण करने का प्रयास’ है। हम हर चीज़ को अपने हिसाब से मोड़ना चाहते हैं, और जब ऐसा नहीं होता, तो दुख, डर और बेचैनी घेर लेती है। लेकिन जो व्यक्ति यह समझ लेता है कि जीवन का हर मोड़ पहले से तय नहीं होता, और हर असफलता भी किसी बड़े उद्देश्य की ओर ले जाती है, उसे चिंता छू भी नहीं पाती। यही स्थिर बुद्धि की पहचान है।

आज के समय में, जब लोग भविष्य को लेकर हर पल परेशान रहते हैं, यह संदेश और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है। श्री कृष्ण हमें सिखाते हैं कि प्रयास करना हमारा कर्तव्य है, लेकिन हर परिणाम को लेकर घबराना हमारी कमजोरी। जो इंसान इस संतुलन को समझ लेता है, वही सच्चे अर्थों में निश्चिंत और मजबूत बनता है।

यह कोट हमें सिखाता है कि

  • हर बात को लेकर चिंतित रहना जीवन को कठिन बना देता है।
  • जो हमारे लिए नहीं है, उसके पीछे खुद को तोड़ना व्यर्थ है।
  • जब बुद्धि स्थिर हो जाती है, तब ही मन को सच्ची शांति मिलती है।
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*** 10th Quote ***

“जो परिवर्तन को स्वीकार नहीं करता, वह नष्ट हो जाता है।”

श्री कृष्ण इस विचार के माध्यम से जीवन का एक कठोर लेकिन सच्चा नियम बताते हैं कि परिवर्तन ही प्रकृति का नियम है। जो व्यक्ति समय, परिस्थिति और ज़रूरत के अनुसार खुद को नहीं बदलता, वह धीरे-धीरे पीछे छूट जाता है। कृष्ण समझाते हैं कि परिवर्तन से डरना स्वाभाविक है, लेकिन उसी डर में फँसे रहना इंसान को भीतर से कमजोर बना देता है।

श्री कृष्ण का संदेश यह है कि बदलाव का विरोध करने के बजाय उसे समझना और अपनाना ही बुद्धिमानी है। जीवन में नई जिम्मेदारियाँ, नई चुनौतियाँ और नए रास्ते आते रहते हैं, और जो व्यक्ति पुराने सोच में अटका रहता है, वह आगे बढ़ने का अवसर खो देता है। आज के दौर में, जहाँ हर चीज़ तेजी से बदल रही है, यह शिक्षा हमें सिखाती है कि जो सीखता है, वही टिकता है।

यह कोट हमें सिखाता है कि

  • बदलाव से भागना नहीं, उसे स्वीकार करना चाहिए।
  • समय के साथ खुद को बेहतर बनाना ही सच्ची समझदारी है।
  • जो बदलना सीख लेता है, वही जीवन में आगे बढ़ता है।
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निष्कर्ष:

अगर इन विचारों को पढ़ कर के अगर आपके मन में थोड़ी भी शांन्ति मिली हो, तो इन्हें आगे अपने प्रिय लोगो के साथ जरुर शेयर करें। हो सकता है, किसी और की उलझी ज़िंदगी में भी श्री कृष्ण के ये शब्द रोशनी भर दे।

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पोस्ट पढ़ने के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद!

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Written By Sudheer Verma, The Founder

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सुधीर वर्मा एक डिजिटल क्रिएटर और मोटिवेशनल कंटेंट राइटर हैं। पिछले कई सालों से ये हिंदी कोट्स, सुविचार, लाइफ मोटिवेशन और फेस्टिवल विशेज पर रिसर्च-बेस्ड कंटेंट लिख रहे हैं। सुधीर का मकसद है कि लोगों तक पॉजिटिव थॉट्स, मीनिंगफुल कोट्स और रियल-लाइफ इंस्पिरेशन पहुंचाई जाए। उनके द्वारा लिखे गए एक्सप्लेनेशन, मीनिंग और लाइफ-लेसन्स रीडर्स को डीप लेवल पर कनेक्ट करने में मदद करते हैं।
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